Tuesday, August 16, 2011

in support of jan lokpal.......


आवाज़ को हमारी आवाज़ तुम भी दो
लड़ाई जी शुरू की है इसे अंजाम तुम भी दो

हम मिल के बनायेंगे बंजर देश को गुलिस्ता
पसीने की बूँद अपनी दो चार तुम भी दो

डर को निकल दिल से कर दो चिता हवाले
जनशक्ति के इस शेर को दहाड़ तुम भी दो

ये जननी जन्म भूमि है स्वर्ग से महान
आज़ादी में इसकी योगदान तुम भी दो.....

3 comments:

  1. हम मिल के बनायेंगे बंजर देश को गुलिस्ता
    पसीने की बूँद अपनी दो चार तुम भी दो

    Bahut Sunder..... Milkar hi Awaz uthani hogi....

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  2. टिप्पणी में देखिए मरे चार दोहे-
    अपना भारतवर्ष है, गाँधी जी का देश।
    सत्य-अहिंसा का यहाँ, बना रहे परिवेश।१।

    शासन में जब बढ़ गया, ज्यादा भ्रष्टाचार।
    तब अन्ना ने ले लिया, गाँधी का अवतार।२।

    गांधी टोपी देखकर, सहम गये सरदार।
    अन्ना के आगे झुकी, अभिमानी सरकार।३।

    साम-दाम औ’ दण्ड की, हुई करारी हार।
    सत्याग्रह के सामने, डाल दिये हथियार।४।

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  3. Now writing on politics!!!!!

    Thats a step forward. Keep it up.

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